टिमटिमाने का अजीब किस्सा

अक्सर अकेले में
मैंने
देखा है
टिमटिमाते आकाश में
कैसे
कितने सारे तारे
यूँही,
खामोश, मध्यम से
भीनी -सी एक चमक में ही
रह जाते है
क्या उनमे
सबसे ज़्यादा
टिमक टिमक कर
आकाश को अपनी रौशनी से
भर देने की
आकांक्षा न थी?
या चमक मेरे दिल को
पसंद बस एक
फ़ितूर था?
हर तारे की
अपनी एक अलग
आरज़ू होगी
होगी न?
और शायद
चमक उन्हें खुद
दिखायी भी न
देती होगी।
रात मे
घूम वह तारे तो शायद
हो सकता है
की किसी बड़े
भूमण्डल
का बस एक
अधूरा हिस्सा  होंगे?
उन्हें इसका इल्म
भी न होगा की,
उनके नाम से यहाँ रोज़
करोड़ो  के
दिल टूटे- जुड़ते है।
टिमटिमाने का
इस से अजीब किस्सा
मैंने न सोचा था |
IMG_2451.JPG

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s